Tuesday, December 9, 2008

हाल-ऐ-मुहोब्बत

कुछ अपनों ने अपनों की खातिर
अपनों का दिल तोड़ दिया
और हमने उन अपनों की खातिर
अपनों को ही छोड़ दिया ... !!

क्या गुनाह किया था मैंने ....
जो तुमसे प्यार बढाया था .... !!
मजबूरिया थी माना,
पर क्यो तुमने बीच राह में छोड़ दिया ...!!

तूफा तो आते ही रहते है ....
जिंदगी की राहो में ...
झुक जाना तूफा के आगे
क्यों तुमने मंज़ूर किया .... !!

ना सोचा इक बार भी तुमने
ये सब कैसे हम सह पाएंगे
जार - जार रोयेंगे, पर ....
तुमको कुछ भी कह पाएंगे ...!!

हर लम्हा मौत का सामान बना ...
ये भी ना जाना तुमने ...
रोने की आदत है तुम्हारी .....
यू कह, हर ज़ज्बात को नोच दिया .... !!

भूल जाओ सब, छोड़ दो हमको,
ये कह, तुमने हमको छोड़ दिया ...
और हमने देखो, आपकी खातिर ...
जीना भी अब छोड़ दिया ... !!

जी तो चाहता है कि ...
तोड़ दू सब रिश्ते - नातों को ...
दर्द से बिलबिलाती रगों को
नोच
डालू अपने तन - मन से !!
आग लगा दू सारे जहा को
कि क्यो यहाँ मुझे पैदा किया ...!!

क्यों बनाई पहले मुहोब्बत,
फ़िर क्यों मज़बूरी को बना दिया ...
रोते है दिन रात इस दर्द--गम में ...
टूट टूट कर मन आहत हुआ ...

तोड़ दिया दिल उसने ही ....
जिससे बे-इन्तहा प्यार किया ....
रोता मन है, रोती आत्मा ,
क्यों हाल ये आज मेरा हुआ ... !!

4 comments:

MANVINDER BHIMBER said...

ना सोचा इक बार भी तुमने
ये सब कैसे हम सह पाएंगे
जार - जार रोयेंगे, पर ....
तुमको कुछ भी न कह पाएंगे ...!!

lajwaab .....ik khwaab le...ik khawaab de

परमजीत बाली said...

अपने दर्द को बहुत सुन्दर गीत बना दिया।

क्यों बनाई पहले मुहोब्बत,
फ़िर क्यों मज़बूरी को बना दिया ...
रोते है दिन रात इस दर्द-ओ-गम में ...
टूट टूट कर मन आहत हुआ ...

ARVI'nd said...

VERY NICE DEAR, I LIKE UR ALL SHAYARIES N I WANT READ AGAIN N AGAIN.........

sangeeta said...

taanya ji ,

क्या गुनाह किया था मैंने ....
जो तुमसे प्यार बढाया था .... !!
मजबूरिया थी माना,
पर क्यो तुमने बीच राह में छोड़ दिया ...!!
ye sab khud ke vash men nahi hota ki aap badhaayen aur pyaar badh jaaye..........aur haan bahut hi swaarthi hai wo jisane aapko beech raah par chhod diya.........

phir usake liye kya gam karna???
dard se labrez rachna.

yun khud ko behaal na karen..
be happy