Sunday, November 2, 2008

गमों ने आज फ़िर रुला दिया..

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ना जाने क्यों गमों ने आज फ़िर रुला दिया

दिखावटी हँसी के पैबन्दों को गमों ने फ़िर हटा दिया ..

गमों पे हसने वाला सागर आज फ़िर कराह उठा..
ढेरो आंसू लिए दामन में.. दिल को फ़िर छलका गया..

जाने क्यों गमों ने आज फ़िर रुला दिया..

पैबंद हँसी के लगाये फिरता था सागर ख़ुद पर..
तार तार कर गमों ने आज फ़िर मुझे रुसवा किया..

बे-रहम जख्मों के नासूर उभर ही आए है
जब की खामोशियों में सागर ने ख़ुद को डुबो दिया..

जाने क्यों आज गमों ने फ़िर रुला दिया..

मरने भी नही देती ये दुनिया-दारी मुझको..
कर्तव्व्यो का बोझ जो मेरे संग डोली में गया..

लुटा लिया अपना वजूद गैरो की खुशियों के लिए ...
फ़िर भी अपना दिल आज बरबाद--शहर सा हो गया..

जाने क्यों गमों ने आज फ़िर रुला दिया..

5 comments:

ARVI'nd said...

आपकी ग़ज़ल बहुत अच्छी है। बार-बार पढने को दिल करता है। अपने गम को औरो से बांटकर देखे कोई न कोई आपके गम को खुशियों में जरुर बदल देगा ।

जरुरी नही जीने का कोई सहारा हो,
जरुरी नही जिसके है हम वो हमारा हो।
कभी-कभी डूब जाया करती है कश्तिया,
जरुरी नही हर किश्तीको मिलता किनारा हो।।

राहुल सि‍द्धार्थ said...

दुनिया मे आये है तो रंजो गम तो साथ होंगे ही.
इसी जिन्दगी को खुबसूरत बनाना ही तो जिन्दगी है.
जीवन से जुरी कविता जिसे महसूस की जा सकती है.

sangeeta said...

पैबंद हँसी के लगाये फिरता था सागर ख़ुद पर..
तार तार कर गमों ने आज फ़िर मुझे रुसवा किया..

paiband se gam chhipate nahi hain dost ,
wo alag se nazar aate hain.
zindagi ki dararon ko rafu kar ,
dard zaroor chhipa pate hain.
par kitna bhi chaaho khud se khud ko chhipaana.
ye ashq bhi kitane zaalim hain jo dil ka har bhed bata jaate hain.

bahut dard bhari rachna hai...
kewal dua karoongi ki jo paiband aapne lagaye hain wo sare aam na ughaden.
god bless u

प्रकाश बादल said...

अच्छा लिखा है जारी रखें।

prakashbadal.blogspot.com

taanya said...

arvind ji..

bahut acchha laga aapka rev. and aapne jo 4 lines likhi..bahut himmet de gayi..thanks a lot..u hi himmet dete rahiyega..

aur koshish karungi...aage b meri rachnaye pasand aaye..

Rahul siddhharth ji..

thanks jihimmet dene k liye.. u hi sath dete rahiyega..

Sangeeta ji..

aapne kaha paiband se gam nahi chhipte, paiband alag se nazer aate hai..dost vo kehte he na garreebbi me aata gila..jb aur koi chara na hoga to paiband hi lagaye jayenge na..

aur baat rahi dararo ko rafu karne ki to kuchh darare paati nahi ja sakti..
sahi kehti hai aap ki ye ashq dil k sb bhed khol jate hai..

thanks for this review.

PRAKASH BADAL JI..

Thanks ji pasand karne k liye aur aage k liye utsaah badhane k liye..