Thursday, October 30, 2008

आज का ये दिन...

आज के ये सुबह-शाम
तुम बिन बहुत तनहा बीते...!
आज पलकों से ढेरो आंसू छलके..!
आज दर्द का....
मेरे घर पर पहरा था..
आज एक बार फ़िर हम....
टूट के बिखरे-सिमटे..!!

आज हमारे प्यार ने
फ़िर रुलाया उनको ....
आज हमारी अदालत ने
मुजरिम ठहराया उनको ....
आज फ़िर कत्ले-आम किया ,
हमने उनके अरमानो का...!
आज एक बार फ़िर.....
वो हमसे रूठे, टूटे.....!!

कैसा ये प्यार है....????
लगता हे जान ले कर जाएगा..!!
कैसा हम दोनों का पागलपन है ....???
यु लगता है किसी दिन .....
यू ही दम घुट जायेगा....!!
उफ़ बी करते है तो....
ख़ुद से ही गिला होता है...!!
रोये तो....
दिल का जनाजा उठता है..!!

आज फ़िर मायूसियों की घटाए है..
आज फ़िर चमन--बरबाद की..
चीत्कार है...
आज फ़िर एक पाक दामन
गुनहगार है....!!

आज हम माफ़ी के काबिल नही है
आज हम उनसे नज़रे मिलाने के भी लायक नही है
आज जो गुजरी उन पर
खुदा हमें कोई तो सज़ा दो..
जान ले लो हमारी या ...
सुकून मेरे जानिब को दो..!!

2 comments:

sangeeta said...

taanya ji,

ye puri kahani dard ka ek afsaana hai,
zindagi kya hai ?bas roothna aur manaana hai.
maafi maang yun apane pyaar ko sharminda na kijiye,
yahi tadka hai pyaar ka jiska lutf aapko uthaana hai.

god bless u

bahadur patel said...

e dile nadan tuhje hua kya hai.